WOH SAFAR !!

ख़ास था पहले फिर आम हुआ।।
यूँही मेरा काम तमाम हुआ।।

ज़िन्दगी हो गई हैं ऐसी, जैसे खेल रहा हो कोई हमें अपना शिकार बनाते हुए जुआ।।।
और सामने खुदा है हमारे एक मौत का कुआं।।

जिस वज़ह से आंगे जाने से दिमाग घबराता हैं।।
और वापस पीछे जाने से दिल कतराता हैं।।

बस वही तो गम हैं, जो हमें हर पल रूलाता हैं।।
बाकी फिर आज के जमाने में गरीबो को कोन अपने यहाँ रोटी खिलाता हैं।।

 सबकों उस इंसान से प्यार निभाना है।।
जिसको सिर्फ और सिर्फ सबसे दूर जाना है।।

मनाने पर कोई मानता नहीं है।।
किसी के दिल का हाल कोई जानता नहीं है।

दिल टूटना तो सिर्फ एक बहाना हैं।।
असलियत मैं तो ये खेल दिमाग का है, जिसे जीतकर हमें उस कमबख्त शक़्स को हराना है।।

पहले हमारा हर हुक़्म शराखो पर होता था।।
और हुक़्म तो अब भी होता है... पर शराखो पर कुछ नहीं होता।।

पहले मौके कम होते थे और मिलना होता था ज्यादा ।।
मौके तो आज भी होते है, पर अब मिलना उनसे हो गया है आधा ।।

कद्र की सबकी एकसी.. पर उनकी थोड़ी ज्यादा।।
और आखिर मैं वही हमसे दूर चले गए करके झूठा वादा !!!
    
                                    - SIDDHARTH SHUKLA




Comments

  1. Kya baat bhai....bohot pyara likha h sach mai🔥

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  2. अच्छे ज़ज्बात हैं 👏

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  3. Itna pyara kaise likh leti ho darling 😘😘☺️☺️☺️

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