WOH GALIYAAN !!

वो गलियां जहां की तहाँ है।।
जहाँ हम जाया करते थे।।

पर वहां अब वह बात कहाँ।।
जिसके लिए हम वहां अपना समय गुज़ारा करते थे।।

रोज सुबह से शाम तक वहां जाने का कोई ना कोई बहाना ढूंढा करते थे।।

उस बालकनी मैं से उनकी वह एक झलक देखने को तरसा करते थे।।

अगर पुहंचने मैं थोड़ा लेट हो जाए तो बड़ा पछताया करते थे।।

क्योंकि उनकी एक झलक देखने के लिए.. उस समय का इंतजार पूरे दिन किया करते थे।।।

अब वो गालियां सूनी सूनी सी लगती हैं.. जहाँ वो रहा करते थे।।।

पर उनके पड़ोसी आज भी वही है.. जो बात बात पर उन्हें फसबया करते थे।।

उनकी उन गालियों मैं चार नए दोस्त बनाये करते थे।।

किसी से अच्छी दोस्ती हो गयी थी तो वहीं किसी से सिर्फ दोस्ती मतलब वाली हुया करती थी।।।

पर अब ना मौका मिलता है और ना अब वो मकशद रहता है।।

बस रहती है तो वो उनकी खाली छत..और उसे देखते हुए हमारे चेहरे पर एक याद भरी मुश्क़राहत... और बस यही है जो हमारा नसीब कहता है ।।।
   
                                    -  SIDDHARTH SHUKLA

Comments

Post a Comment

Popular Posts