WAQT !!!

गुज़रता रहा हमेशा सामने से तू हमारे
हमने कभी तेरी क़दर ना की...
अब हो रहा है पछतावा
जब तुमने चाहते हुए भी हमपर कोई रेहम न की...

धमकियां दी तूने बार बार खुद पास बुलाकर
हमने कभी उसकी कदर न की..
अब जब चला गया सब ख्वाबो को सुलाकर
तो खयाल आया... कि चाहते हुए भी हमने खुदपर कोई रेहम ना की..

तू जब साथ था तो लोगो ने दस्तक दी थी जितनी थी जरूरी..
पर तेरे जाने के बाद.. कविताएँ लिखकर करता हूँ उन जरूरतों को पूरी...

मदद के लिए रही हर कोशिश तेरी पूरी
पर अब क्या करे... तेरे रहते हुए हमें तुम्हारी इज़्ज़त करनी थी... जो रह गयी थी अधूरी...

तूने सुधरने के मौके दिए हमे पूरे
पर बुद्धि चली नही .. जब तक हो गए हम बिल्कुल अधूरे...

अब होता है पछतावा.. की कदर की होती हमने तेरी...
पर अब क्या करे.. जिएंगे अपने आगे की ज़िंदगी जैसे भी होगी तेरी दुआओं से पूरी...

ऐ वक़्त रहना तू हमेशा साथ हमारे
कभी ना करना दगा...  की रह जाये हम इस बुज़दिल दुनिया के सहारे..

ऐ दोस्तों ... देखलो और सीखलो इस वक़्त की क़ीमत को...
कभी मरते समय ये पछतावा न हो कि... कास कर लिया होता वो जो हमारे लिए था जरूरी...


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